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Monday, October 20, 2008

मै इतना तनहा क्यो हूँ !!

मै नहीं जनता खुद को
और ये भी नहीं जानता की
मै इतना तनहा क्यों हूँ!!

सोचा करता हूँ, एक है
जो मुझे जानता है मुझसे बेहतर
सुन लूँगा कभी उसकी जुवानी खुद को
पर ये नहीं जानता मै इतना सोचता क्यों हूँ!!

जाने क्या हूँ मै उसके लिए
बेवफा भर तो मैंने सुना
उसके आगे अनसुना कर दिया
ऐसे अनसुना के ग़लतफ़हमी पे खुश हूँ
या ऐसे खुशफहमी पे शर्मिंदा
ये नहीं जानता और
ये भी नहीं जानता की मै ऐसा करता क्यों हूँ!!

6 comments:

रचना गौड़ ’भारती’ said...

चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है ।
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
लिखते रहिए लिखने वाले की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल,शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका भी देखें
www.zindagilive08.blogspot.com

!!अक्षय-मन!! said...

अच्छा लिखा है सुन्दर अनुभव सिर्फ आप ही ऐसे नहीं मैं भी थोडा थोडा ऐसा हूं मैं भी बहुत सोचता हूं
बहुत खूब............
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है आने के लिए
आप
๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑
इस पर क्लिक कीजिए
आभार...अक्षय-मन

संगीता पुरी said...

आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

sab ke sab andar se akele hain magar kyo? yah koi nahin janta. naa hee janane ki koshish karta hai.
narayan narayan

अभिषेक मिश्र said...

ऐसे अनसुना के ग़लतफ़हमी पे खुश हूँ
या ऐसे खुशफहमी पे शर्मिंदा
अच्छी रचना, स्वागत है आपका ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी.

Amit K Sagar said...

Waah! खूबसूरत. जारी रहें. शुभकामनाएं.

मेरे ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं.