मै नहीं जनता खुद को
और ये भी नहीं जानता की
मै इतना तनहा क्यों हूँ!!
सोचा करता हूँ, एक है
जो मुझे जानता है मुझसे बेहतर
सुन लूँगा कभी उसकी जुवानी खुद को
पर ये नहीं जानता मै इतना सोचता क्यों हूँ!!
जाने क्या हूँ मै उसके लिए
बेवफा भर तो मैंने सुना
उसके आगे अनसुना कर दिया
ऐसे अनसुना के ग़लतफ़हमी पे खुश हूँ
या ऐसे खुशफहमी पे शर्मिंदा
ये नहीं जानता और
ये भी नहीं जानता की मै ऐसा करता क्यों हूँ!!
6 comments:
चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है ।
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
लिखते रहिए लिखने वाले की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल,शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका भी देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
अच्छा लिखा है सुन्दर अनुभव सिर्फ आप ही ऐसे नहीं मैं भी थोडा थोडा ऐसा हूं मैं भी बहुत सोचता हूं
बहुत खूब............
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है आने के लिए
आप
๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑ इस पर क्लिक कीजिए
आभार...अक्षय-मन
आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
sab ke sab andar se akele hain magar kyo? yah koi nahin janta. naa hee janane ki koshish karta hai.
narayan narayan
ऐसे अनसुना के ग़लतफ़हमी पे खुश हूँ
या ऐसे खुशफहमी पे शर्मिंदा
अच्छी रचना, स्वागत है आपका ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी.
Waah! खूबसूरत. जारी रहें. शुभकामनाएं.
मेरे ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं.
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