a

Tuesday, December 16, 2008

कभी !!

कभी ख्वाबों की बातें करना
कभी आपको दिल तक लाना
कभी हँसी सी बातें कहकर
एकटक आपको देखे जाना !
कभी आपके सामने रहकर
आपको ही बस सोचे जाना !!

कभी ख़ुद में आपको देखना
कभी आप में मैं हो जाना
जाने क्यों रास आने लगी अब
दिल्लगी से दिल को बहलाना
किसको अब जल्दी दिखती है
दिल की बात जुवा तक लाना!!

कभी अजनबी बातें कहकर
आपके चेहरों को पढ़ जाना
कभी आपका अपना बनकर
आपके पहलु में सर को झुकाना
काश कभी ऐसा हो जाए
आपको ऐसे ही लिखते जाना...

Saturday, December 6, 2008

आ भी जाओ!

नही, बस और नही बुलाऊंगा मै
कहूँ, तुम याद नही आते तो झूठा कहलाऊंगा मैं!
हर बार बह जाते है गुस्सैल लहरों में
अब रेत पर घर नही बनाऊंगा मैं!

तुम भी तोकभी बढाओ पहला कदम
अब न पहल कर पाउँगा मै!
कह दो तुम्हे नही है इंतज़ार मेरा
ये झूठ तो न कह पाउँगा मैं!

कतरा भर जिंदगी जीभर लूँ जरा
गर और मिली तो खुशी से मर ही जाऊंगा मै!
क्यो हो तुम खामोश खडे
आ जाओ, आ भी जाओ, अब न चल पाउँगा मै!!

गम !

तुमसे दूर जाने का गम ही तो है मुझे
जो पास आने की इजाज़त नही देता!

बिछड़ जाने का डर ही तो है मुझे
जो मिलने की इजाज़त नही देता!

पर ये कमबक्त दिल समझता नही
भूल जाने की इजाज़त नही देता!

तुम अनछुई सी !

तुम अनछुई सी, एक कुल्हड़ जैसी
जो एक बार होंठो से छुए जाने पर,
किसी से चूमे जाने के बाद
आखिरी साँस तक बस उसी की हो चली!

और वो मेम चीनी मिटटी के कप जैसी
जो एक के होंठों से लगने के बाद,
फिर एक बार धुलकर, सजकर है तैयार
किसी और के आगोश में जाने को !!