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Saturday, December 6, 2008

तुम अनछुई सी !

तुम अनछुई सी, एक कुल्हड़ जैसी
जो एक बार होंठो से छुए जाने पर,
किसी से चूमे जाने के बाद
आखिरी साँस तक बस उसी की हो चली!

और वो मेम चीनी मिटटी के कप जैसी
जो एक के होंठों से लगने के बाद,
फिर एक बार धुलकर, सजकर है तैयार
किसी और के आगोश में जाने को !!

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