नही, बस और नही बुलाऊंगा मै
कहूँ, तुम याद नही आते तो झूठा कहलाऊंगा मैं!
हर बार बह जाते है गुस्सैल लहरों में
अब रेत पर घर नही बनाऊंगा मैं!
तुम भी तोकभी बढाओ पहला कदम
अब न पहल कर पाउँगा मै!
कह दो तुम्हे नही है इंतज़ार मेरा
ये झूठ तो न कह पाउँगा मैं!
कतरा भर जिंदगी जीभर लूँ जरा
गर और मिली तो खुशी से मर ही जाऊंगा मै!
क्यो हो तुम खामोश खडे
आ जाओ, आ भी जाओ, अब न चल पाउँगा मै!!
कहूँ, तुम याद नही आते तो झूठा कहलाऊंगा मैं!
हर बार बह जाते है गुस्सैल लहरों में
अब रेत पर घर नही बनाऊंगा मैं!
तुम भी तोकभी बढाओ पहला कदम
अब न पहल कर पाउँगा मै!
कह दो तुम्हे नही है इंतज़ार मेरा
ये झूठ तो न कह पाउँगा मैं!
कतरा भर जिंदगी जीभर लूँ जरा
गर और मिली तो खुशी से मर ही जाऊंगा मै!
क्यो हो तुम खामोश खडे
आ जाओ, आ भी जाओ, अब न चल पाउँगा मै!!
1 comment:
yar,hum to kab se Intejar kar rahe hai koi mujhe bulaye.
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