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Friday, August 14, 2009

परिभाषा

वह संगतराश के ख्वाबों की
हकीकत थी
वह संगमरमर की मूरत थी
जिसे हर नज़रों ने देखा, हर दिल
ने सराहा, उस बुत को...
जिसकी आँखों में रौशनी न थी,
जुबान पर शब्द न थे
फिर भी वह रूप
की परिभाषा थी
"हुस्न आँखों में नही,
देह में नही,
मुहाबत भरी उस नज़र में होती है
जो निहारती है किसी को प्यार से
इस ख्याल के साथ - क्यो इतनी फुरसत से
बनाया गया है ए खुदाया
जिसे देखने के लिए धड़कानो की उम्र कम है!"

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